वन विभाग ने एक आदेश जारी किया है जिसके अनुसार जारी किये रेस्क्यू को लेकर एक निर्णय लिया गया है कि कोई भी दल सूचना मिलते ही तुरंत जानवरों को बचाने के लिए नहीं जाएगा इससे पहले वह विरिष्ठ अधिकारियों से लिखित अनुमति लेगा। इस आदेश पर एक नई बहस छिड़ गई है। जिसके बाद जंगली जानवरों की जान बचाना तो मुशिकल हो ही गया है इसके साथ ही जिन पर जंगली जानवर हमला कर सकता है उनकी जान बचाया भी मुश्किल हो जाएगा।
आदेश आने का करेगे इंतजार
वन विभाग के मुख्यालय ने वन्य प्राणियों के रेस्क्यू और संसाधनों से जुड़े नियमों में बदलाव किया गया है। इस संबध में इंदौर वन मंडल की बैठक संपन्न हुई। जिसमें वन संरक्षकऔर डीएफओ ने रेस्क्यू को लेकर आदेशों को तुरंत लागू करने के आदेश दिए है। लेकिन इस पर अमल करना आसान नहीं है।
सभी जानकारी देना होगी पहले
यहां तक की कोई जानवर कई लोगों पर हमला भी कर सकता है। इस कोई अफसर संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। शेडयुल वन के लिए जानवर जैसे बाघ, टाइगर के लिए भी इस नियमों का अनिवार्य़ रूप से पालन किया जाए। इसके साथ ही उन्हें वापर जंगल में छोड़न की भी अनुमति अधिकारियो से लेना होगी।
डैटा बेस होगा तैयार
यहां पर रेस्क्यू के दौरान जानवरों का डेटा तैयार होगा। जिससे भविष्य में इनका रिकॉड वन विभाग के पास रहेगा। राला मंडल टीम को रेस्क्यू की जिम्मेदारी दे रखी है। ऐसे में उज्जैन खंडवा, वृत्त में भी टीम जाती है। लेकिन अब राला मंडल की टीम सिर्फ चार जिलो में ही बचाव कार्य करने जाएगी।
वाटसअप पर होगी अनुमति मान्य
यहां मुख्यालय में हुई बैठक में निर्णय लिया गया है कि वन्यजीव, संरक्षण को लेकर रेस्क्यू पर जाने वाली टीम को वाटसअप पर ही अऩुमति लेना होगी। बाकि औपचारिकता वन मंडल कार्यालय करेगा जिससे बचाब कार्य पूर्ण होने से बाद रिपोर्ट देना होगी।


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