इंदौर में दीप जलाकर पूछा सवाल – कब जिंदा होगी जीवनदायिनी?
इंदौर, मध्य प्रदेश — इंदौर की दो प्रमुख नदियों कान्ह और सरस्वती को पुनर्जीवित करने का अभियान 16 साल पूरे कर चुका है। इस दौरान प्रशासन ने विभिन्न परियोजनाओं पर ₹1100 करोड़ से अधिक की राशि खर्च की है, लेकिन ये नदियाँ आज भी नाले के रूप में ही बह रही हैं।
शहर की सामाजिक संस्था अभ्यास मंडल ने इस विफलता, भ्रष्टाचार और इच्छाशक्ति के अभाव को उजागर करने के लिए शुक्रवार को कृष्णपुरा छत्री घाट पर एक भावुक दीप महोत्सव का आयोजन किया। इस आयोजन में प्रबुद्धजनों ने दीप जलाकर प्रशासन से सीधा सवाल पूछा कि जनता की जीवनदायिनी रही यह नदी आखिरकार कब अपने मूल स्वरूप में वापस आएगी।
16 साल का संघर्ष, ₹1100 करोड़ का भ्रष्टाचार
संस्था अभ्यास मंडल ने साल 2008 में कान्ह-सरस्वती नदी को पुनर्जीवित करने का बीड़ा उठाया था। समय के साथ, यह आंदोलन शहर का केंद्र बिंदु बन गया और नेता व अधिकारी भी इसमें शामिल हुए।
- लागत: 16 साल में प्रशासन ने नदी को साफ करने और नालों को टैप करने के लिए ₹1100 करोड़ की भारी-भरकम राशि जारी की।
- स्थिति: इतनी बड़ी धनराशि खर्च होने के बावजूद, नदी में नाले का गंदा पानी मिल रहा है और यह आज भी ‘नाले’ के रूप में ही बह रही है।
- आरोप: अभ्यास मंडल का मानना है कि इच्छाशक्ति के अभाव और पैसों की भूख के कारण यह परियोजना नेताओं और अधिकारियों की ‘कमाई का जरिया’ बनकर रह गई है।
इन तमाम धोखों और झूठे वादों के बावजूद, अभ्यास मंडल के कार्यकर्ता आज भी नदी को फिर से जिंदा करने की उम्मीद के साथ इस प्रयास में डटे हुए हैं।
दीप महोत्सव: जनता से जन आंदोलन बनने की अपील
अभ्यास मंडल द्वारा आयोजित दीप महोत्सव में शहर के पर्यावरण और जल स्त्रोतों के संरक्षण पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। इस आयोजन की शुरुआत 2010 से लगातार की जा रही है।
शिवाजी मोहिते ने कहा, “दीपावली के इस पावन अवसर पर जब हमारे घरों के आंगन दीपों से जगमगा उठे हैं, तो क्यों न एक दीप अपनी नैसर्गिक नदी के नाम भी जलाएं। आज लगाया गया हर दीप हमारी आस्था, शहर के प्रति हमारी जिम्मेदारी और शहर के उज्जवल भविष्य का प्रतीक बनेगा।”
रामेश्वर गुप्ता ने बताया कि कुछ लोग अपने घर से भी दिया लाकर लगाते हैं। मालासिंह ठाकुर ने 2010 से किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी और संकल्प लिया कि यह प्रयास अनवरत जारी रहेगा।
प्रबुद्धजनों ने एक सुर में कहा कि शहर की जनता ही इस नदी को फिर से जिंदा कर सकती है। उन्होंने जनता से इस प्रयास को एक जन आंदोलन में बदलने का संकल्प लेने की अपील की।
दीप महोत्सव का शुभारंभ श्यामसुंदर यादव, शंकर गर्ग, अशोक जायसवाल, रामबाबू अग्रवाल, ओपी जोशी और गौतम कोठारी ने किया। इस आयोजन में शहर के कई गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।


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