इंदौर — खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 (FSSA) और उसके नियम, 2011 के तहत चलाए जा रहे ‘मिलावट से मुक्ति अभियान’ के अंतर्गत, निर्णायक अधिकारी एवं अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट श्री नवजीवन विजय पंवार ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए तीन खाद्य प्रतिष्ठानों पर कुल ₹4 लाख 25 हज़ार का भारी जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई इन प्रतिष्ठानों से लिए गए खाद्य नमूनों के ‘अवमानक’ (Sub-standard) पाए जाने के बाद की गई है, जो सीधे तौर पर उपभोक्ता स्वास्थ्य एवं सुरक्षा का उल्लंघन है।
प्रमुख कार्रवाई और जुर्माना राशि
यह निर्णायक फैसला बुधवार को सुनाया गया, जिसमें शहर के तीन प्रतिष्ठानों पर गंभीर मिलावट के लिए अलग-अलग राशि का जुर्माना लगाया गया है:
अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट श्री पंवार ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यह जुर्माना खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत लगाया गया है। उन्होंने कहा कि खाद्य सामग्री में मिलावट या उसके अवमानक पाए जाने को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, क्योंकि यह सीधे तौर पर आम जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ है।
‘मिलावट से मुक्ति’ अभियान
यह कार्रवाई मध्य प्रदेश सरकार द्वारा राज्यव्यापी रूप से चलाए जा रहे ‘मिलावट से मुक्ति अभियान’ का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य त्योहारों और सामान्य दिनों में खाद्य सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है। इस अभियान के तहत, खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमें लगातार विभिन्न खाद्य प्रतिष्ठानों, डेयरियों, रेस्टोरेंट्स और थोक विक्रेताओं से नमूने एकत्र करती हैं।
राजलक्ष्मी ट्रेडर्स और रामा दूध डेयरी से लिए गए नमूनों में मानक गुणवत्ता की कमी पाई गई, जबकि महादेव रेस्टोरेंट के पनीर और घी जैसे मुख्य व्यंजनों के सैंपल भी निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। निर्णायक अधिकारी ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि जब तक खाद्य प्रतिष्ठान गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं करते, तब तक उन पर लगातार निगरानी रखी जाएगी और जुर्माना लगाया जाता रहेगा।
खाद्य सुरक्षा विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हमने हाल ही में शहर भर में निरीक्षण तेज किए हैं। ये जुर्माना राशि एक कड़ा संदेश है कि अगर खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से समझौता किया गया, तो प्रतिष्ठानों को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। हमारा प्राथमिक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इंदौरवासियों को स्वच्छ और सुरक्षित खाद्य सामग्री मिले।”
कानूनी परिप्रेक्ष्य और भविष्य के निहितार्थ
खाद्य सुरक्षा अधिनियम के प्रावधानों के तहत, अवमानक पाए जाने वाले खाद्य पदार्थ न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि प्रतिष्ठान नियमों का उचित पालन नहीं कर रहे हैं। इस प्रकार के फैसलों से न केवल प्रतिष्ठानों पर आर्थिक बोझ पड़ता है, बल्कि उनकी प्रतिष्ठा पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट द्वारा सुनाया गया यह फैसला शहर के अन्य खाद्य विक्रेताओं के लिए एक चेतावनी है। उम्मीद है कि इस कठोर कार्रवाई के बाद अन्य प्रतिष्ठान अपनी खाद्य गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया की निगरानी को और मजबूत करेंगे। यदि ये प्रतिष्ठान भविष्य में भी नियमों का उल्लंघन करते पाए जाते हैं, तो उन पर और कड़ी कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें लाइसेंस रद्द करना भी शामिल हो सकता है। यह कार्रवाई स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि नियामक प्राधिकरण खाद्य सुरक्षा के प्रति गंभीर हैं और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।


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