जालंधर: बरसाती सीजन में जहां लोगों को पानी जमा होने की समस्या ने खूब परेशान किया, वहीं अब बरसात का पानी उतरने के बाद कूड़े और गंदगी की समस्या शहरवासियों के लिए नई आफत बनकर सामने आ गई है। शहर की सड़कों और मोहल्लों में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं, जिनमें बरसात का पानी मिक्स होकर गंदगी को और भयावह बना रहा है। हालात ऐसे हैं कि कई जगहों पर दृश्य नरक जैसे दिखाई दे रहे हैं।
शहरभर में फैली इस गंदगी का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ने लगा है। हजारों लोग बीमारियों की चपेट में आ चुके हैं और डॉक्टरों के क्लीनिक पर लंबी-लंबी लाइनें लगनी शुरू हो गई हैं। खासकर कॉलोनियों और मोहल्लों में छोटे क्लीनिक चलाने वाले डॉक्टरों के पास मरीजों की भारी भीड़ उमड़ रही है।
गंदगी से फैल रही बीमारियों के कारण वायरल बुखार सबसे आम लक्षण के रूप में सामने आ रहा है, जिसके चलते लोग सूखी खांसी, गले की खराश और बुखार से पीड़ित हो रहे हैं। इस बीमारी से पूरे शरीर में दर्द और कमजोरी महसूस होती है। इसके अलावा डायरिया और इन्फेक्शन के भी कई मामले दर्ज किए गए हैं। वहीं टायफाइड से पीड़ित लोगों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।
फॉगिंग मामले में निगम की लापरवाही पर उठ रहे सवाल
नगर निगम के सैनिटेशन और हेल्थ विभाग के पास दो हजार के करीब कर्मचारी और दो सौ से ज्यादा गाड़ियां मौजूद हैं। बावजूद इसके, समय-समय पर फॉगिंग और कीटनाशक दवाओं का छिड़काव नहीं किया जाता। साल भर में मुश्किल से 15–20 दिन ही फॉगिंग करवाई जाती है, जबकि मानसून के दिनों में इसकी सबसे ज़्यादा जरूरत होती है। इस समय भी जब बरसाती बीमारियां यौवन पर हैं, निगम ने अभी तक ढंग से फॉगिंग नहीं करवाई है जिससे निगम की लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं।


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