जबलपुर — मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग के वीडियो को सोशल मीडिया पर गलत तरीके से पेश करने और उनका मजाक बनाने वालों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से 102 विवादित यूआरएल (URLs) को 48 घंटों के भीतर हटाने के निर्देश दिए हैं।
यह मामला तब सामने आया जब कोर्ट की लाइव स्ट्रीमिंग क्लिप्स को एडिट करके ‘मीम्स’ और ‘शॉर्ट्स’ के रूप में वायरल किया जाने लगा, जिससे न्यायपालिका की छवि धूमिल हो रही थी।
याचिका: “मिर्च-मसाला लगाकर बेचे जा रहे वीडियो”
जबलपुर निवासी अधिवक्ता अरिहंत तिवारी, विदित शाह और डॉ. विजय बजाज द्वारा दायर याचिका में गंभीर आरोप लगाए गए थे, याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर अदालती कार्यवाही की चयनात्मक क्लिपिंग (Selected Clipping) डाली जा रही है। जजों द्वारा ओपन कोर्ट में कही गई बातों को संदर्भ से काटकर और ‘मिर्च-मसाला’ लगाकर प्रसारित किया जाता है। यह न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में आता है और न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा को कमजोर करता है। यह मध्य प्रदेश लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग नियम 11 (बी) का उल्लंघन है, जो किसी भी रूप में अदालती सामग्री को एडिट करने या छेड़छाड़ करने से रोकता है।
कोर्ट का एक्शन और मेटा का जवाब
पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मेटा (फेसबुक/इंस्टाग्राम) और अन्य कंपनियों को निर्देश दिया था कि यदि उन्हें आपत्तिजनक वीडियो के लिंक दिए जाएं, तो वे उन्हें हटा दें। याचिकाकर्ता अधिवक्ता अरिहंत तिवारी ने कोर्ट में 102 विवादित यूआरएल लिंक की सूची पेश की। युगलपीठ ने इस सूची का संज्ञान लेते हुए संबंधित कंपनियों को निर्देश दिया कि ये सभी वीडियो 48 घंटों में हटा दिए जाएं।
यूट्यूब की जगह ‘वेबेक्स’ की मांग
याचिका में सुरक्षा और गरिमा बनाए रखने के लिए तकनीकी सुझाव भी दिए गए, मांग की गई है कि यू-ट्यूब (सार्वजनिक मंच) के स्थान पर वेबेक्स (Webex) आधारित प्लेटफॉर्म के जरिए प्रकरणों की लाइव स्ट्रीमिंग की जाए, जो अधिक सुरक्षित और नियंत्रित है। यह भी मांग की गई कि रजिस्ट्रार आईटी इस तरह की गतिविधियों पर निरंतर निगरानी रखें और नियंत्रण सुनिश्चित करें।
गौरतलब है कि कोर्ट ने पूर्व में ही क्रिमिनल कोर्ट (आपराधिक मामलों) की लाइव स्ट्रीमिंग पर रोक लगा दी थी। इस मामले की अगली सुनवाई अब 24 मार्च को निर्धारित की गई है।

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