दो कमरे पुराने जर्जर हो चुके हैं, जान का खतरा इसलिए बंद
इंदौर। निजी स्कूल जितनी तेजी से बढ़ रहे हैं शासकीय स्कूल उतनी ही गति से कम होते जा रहे हैं और जो स्कूल बच्चे हैं उनमें भी कहानी बच्चों के बैठने की व्यवस्था नहीं है तो कहीं शिक्षकों की व्यवस्था नहीं। शहर से लगे हुए टिगरिया में भी कक्षा आठवीं तक ऐसा ही विद्यालय चल रहा है, जिसमें आठ कक्षाओं के लिए कुल तीन कक्ष और 3 शिक्षक सहित 4 का स्टॉफ हैं।
पूरे प्रदेश में वैसे तो स्कूलों की हालत किसी से छिपी नहीं है लेकिन जिन स्कूलों में शिक्षक हैं कुछ व्यवस्थाएं हैं वहां भी आप हालात बिगड़ते जा रहे हैं। शहर से लगे टीगरिया में भी पुराना शासकीय माध्यमिक विद्यालय है जिसमें कुल पांच कमरे बने हुए हैं इनमें दो पुराने कमरे इतनी जर्जर होकर जमीन में धंस गए हैं विद्यार्थी या शिक्षक इनके पास भी नहीं जाना चाहते जान का खतरा है। अब यहां कुल तीन कक्ष हैं इनमें आठ कक्षाओं के बच्चों को बिठाया जाता है, तो शिक्षक एक अलमारी और बाहर मैदान में ही गुजारा करते हैं।
वैसे तो शिक्षक बोलने से बचते हैं लेकिन पूछने पर बताया कि वह कई बार इस समस्या से जिला शिक्षा अधिकारी और प्रशासन, शासन को अवगत करा चुके हैं लेकिन सुनवाई नहीं हुई। स्कूल में बच्चे भी काम है लेकिन 70- 80 बच्चों के हिसाब से सुविधा बिल्कुल भी नहीं है।

शहर में कई जर्जर स्कूल
इंदौर शहर और जिला सहित पूरे प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे स्कूल है जो एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं तो जर्जर इमारत की भी कमी नहीं है। इंदौर शहरी सीमा में 30 से अधिक ऐसे विद्यालय हैं जिनके भवन पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं।


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