78 एमएलडी के पुराने प्लांट में साफ नहीं होता सीवर का पूरा पानी
पानी के साथ स्लज भी नदी में छोड़ रहे
पार्श्व बिल्डर को ठेका, हर माह लाखों का भुगतान और काम कुल 10 – 15 प्रतिशत
इंदौर। सीवरेज के पानी को साफ करके और स्लज निकाल कर पानी को फिल्टर करने के बाद नदी में छोड़ा जाना चाहिए इसके लिए बड़े-बड़े एसटीपी प्लांट लगाए गए हैं। लेकिन नगर निगम की लापरवाही और ठेकेदार फर्म की कमाई के चक्कर में पूरे पानी को ट्रीट नहीं करते हुए सीधा नदी में छोड़ा जा रहा है। 78 एमएलडी क्षमता वाले ट्रीटमेंट प्लांट में मुश्किल से 15 से 18 एमएलडी पानी का ट्रीटमेंट किया जाता है जबकि बाकी पानी को ऐसे ही नदी में छोड़ा जा रहा है। इतना ही नहीं पानी से स्लज भी पूरा नहीं निकाला जा रहा है।
नगर निगम और निगम द्वारा पाल गए ठेकेदार कंपनियों ने जनता का करोड़ों रुपए बर्बाद करके भी नदियों को प्रदूषित करने का ठेका ले रखा है। हर साल करोड़ों खर्च के बाद भी पानी साफ नहीं हो रहा है। शहर के सीवरेज का पानी सीधा नदी में जाने से रोकने के लिए और सीवर के पानी को साफ कर नदी में छोड़ने के लिए सरकार ने क

रोड़ों पर खर्च करके सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट ( एसटीपी ) लगाए हैं। ऐसा ही एक कई वर्षों पुराना प्लांट कबीर खेड़ी रोड पर है। इस रोड पर तीन प्लाट है एक 12 एमएलडी का एक 78 एमएलडी और एक नया बनाया गया 450 एमएलडी का प्लांट है। 78 एमएलडी का प्लांट पूरी तरह काम नहीं कर रहा है और इस प्लांट से सलज के साथ दूषित पानी
छोड़ा जा रहा है। हालांकि रोड की तरफ दूसरी तरफ बने नए प्लांट में इस पानी को ट्रीट करने की व्यवस्था की गई है लेकिन वहां भी बड़े एरिया में बने माल संग्रह क्षेत्र में सिर्फ एक जगह मशीन लगी है और पानी सीधा नदी में जा रहा है। यही स्थिति 12 एमएलडी वाले प्लांट में भी है। पार्श्व बिल्डर की कमाई के चक्कर में नदी में जहर घोल रहे हैं।
इंजीनियर, केमिस्ट, कर्मचारी सब नदारद
जनहित मीडिया के प्रतिनिधि 78 एमएलडी प्लांट पर पहुंची तो चौकीदार ने दरवाजे पर ही रोक दिया। उससे पूछताछ की कितने कर्मचारी है तो कल तीन चार कर्मचारी मौके पर थे

। केमिस्ट और इंजीनियर के बारे में पूछने पर बताया कि अभी नहीं है, हालांकि सच यह है कि कभी नहीं आते हैं। जबकि केमिस्ट सहित इस प्लांट पर कंपनी को 65 कर्मचारी रखना हैं। एक शिफ्ट में कम से कम 20 कर्मचारी होना था, लेकिन 4 भी नहीं थे। हमने पिछले 5 दिन निगरानी की, प्लांट पर कुल 3- 4 कर्मचारी ही हैं।
2 जिम्मेदार दो अलग जवाब
78 एमएलडी के प्लांट के बारे में बात करते हुए जब नगर निगम के अधिकारी अश्विन जनवरी से बात की तो उन्होंने पूरा पानी ट्रीट होने और नदी में साफ ट्रांसपेरेंट पानी छोड़ने की बात कही। ( हालांकि यह सही नहीं है, हमारे पास उपलब्ध वीडियो भी इसका प्रमाण है )
वहीं ठेकेदार कंपनी पार्श्व बिल्डर के सुमंत लोहाडिया से पूछा कि 78 एमएलडी का प्लांट है तो पूरा 78 एमएलडी पानी ट्रीट क्यों नहीं होता इस पर उन्होंने कहा कि पुरानी मशीने है, जितनी व्यवस्था है उतना काम हो जाता है। हमें नईं मशीन लगाने के लिए या संसाधन बढ़ाने के लिए निगम पैसा नहीं देता है।

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