इंदौर में 25 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स के साथ मंथन, ‘समर्पित नीति’ बनी आधार
इंदौर — मध्य प्रदेश को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) के लिए एक पसंदीदा गंतव्य के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से गुरुवार (13 नवंबर 2025) को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में “एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0” के तहत “एमपी जीसीसी लीडरशिप कनेक्ट राउंडटेबल” का सफल आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक में 25 से अधिक GCCs के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और राज्य की दीर्घकालिक तकनीकी रणनीति को दिशा देने के लिए सार्थक चर्चा की।
सरकार की प्राथमिकता: समर्पित GCC नीति
अपर मुख्य सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी श्री संजय दुबे ने स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश को GCC के लिए एक पसंदीदा गंतव्य बनाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
- नीतिगत पहल: श्री दुबे ने बताया कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने GCC की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए समर्पित GCC नीति बनाई है।
- सशक्त इकोसिस्टम: उन्होंने कहा कि टियर-2 शहरों (जैसे इंदौर, भोपाल) में उपलब्ध अत्याधुनिक सुविधाएँ GCC के लिए एक सशक्त बिजनेस इकोसिस्टम बनाने में सक्षम हैं।
- टेक्नोलॉजी फोकस: राज्य में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश, डाटा सेंटर नीति (सब्सिडी के साथ), और स्पेस टेक्नोलॉजी नीति (तैयारी में) पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
- टैलेंट पूल: आईआईटी इंदौर देश का एकमात्र संस्थान है जहाँ स्पेस टेक्नोलॉजी में बीटेक एवं एमटेक कोर्स संचालित किए जा रहे हैं। साथ ही, देश के 10% से अधिक गेमिंग आईपी क्रिएशन मध्यप्रदेश से हुए हैं, जो राज्य की तकनीकी क्षमता और टैलेंट की उपलब्धता को दर्शाते हैं।
नीतिगत और प्रशासनिक सहयोग
GCC की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार द्वारा कई प्रशासनिक और नीतिगत सुधार किए गए हैं:
- व्यवसायों में सुगमता: संपदा पोर्टल के माध्यम से आसान रजिस्ट्री, लेबर लॉ में सरलीकरण।
- विवाद निपटान: साइबर तहसील के माध्यम से विवादों का त्वरित निपटान।
- वित्तीय प्रोत्साहन: पेरोल सब्सिडी और पेटेंट असिस्टेंस जैसी वित्तीय सुविधाएँ।
- हरित पहल: ग्रीन एनर्जी की उपलब्धता और कार्बन क्रेडिट व्यवस्था जैसे पर्यावरणीय उपाय सकारात्मक बिजनेस इकोसिस्टम को सुदृढ़ बनाते हैं।
उद्योग प्रतिनिधियों के सुझाव
GCC लीडर्स ने राज्य के टैलेंट पूल की सराहना की लेकिन कुछ सुझाव भी दिए:
- टैलेंट और शिक्षा: वेना इंडिया सेंटर हेड गौतम यादव ने IIT इंदौर, MANIT भोपाल और GSITS इंदौर जैसे संस्थानों की उपस्थिति की सराहना की और GCC के सशक्त विकास के लिए सीनियर लीडरशिप को आकर्षित करने का सुझाव दिया।
- वित्तीय अनुकूलता: वेना इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट पार्थ सेन गुप्ता ने कहा कि मध्यप्रदेश में वित्तीय क्षेत्र की विशेषता और संभावनाएँ GCC की स्थापना के लिए अत्यंत अनुकूल हैं।
- स्थानीय भर्ती: केपीएमजी के पार्टनर श्री गौरव कुमार ने टियर-2 शहरों में उत्कृष्ट टैलेंट पूल की उपलब्धता पर जोर दिया, क्योंकि यहाँ के युवा राज्य में ही रहकर काम करना पसंद करते हैं। एनटीटी डाटा के क्षितिज बंथिया ने GCC में स्थानीय भर्ती को प्रोत्साहित करने की बात कही।
- निरंतरता: ई एंड वाई एलएलपी के पार्टनर आदित्य क्षेत्रपा ने कहा कि GCC की स्थापना के साथ उसकी निरंतरता पर भी ध्यान देना आवश्यक है, ताकि कार्य त्वरित गति और कम लागत से हो सके।
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स की स्थापना से राज्य में न केवल तकनीकी और औद्योगिक क्षमताएँ सशक्त होंगी, बल्कि रोज़गार, नवाचार और कौशल विकास के नए अवसर भी सृजित होंगे।


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