नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोशल और ई-स्पोर्ट्स गेम्स की आड़ में कथित तौर पर संचालित होने वाले ऑनलाइन जुए और सट्टेबाजी प्लेटफॉर्मों पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश देने की मांग वाली एक जनहित याचिका (PIL) पर केंद्र सरकार से मदद मांगी है और जवाब तलब किया है।
याचिका का विवरण:
- याचिकाकर्ता: थिंक टैंक ‘सेंटर फॉर अकाउंटेबिलिटी एंड सिस्टमिक चेंज’ (CASC)।
- पीठ: न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ।
- शीर्ष अदालत का निर्देश: पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से जनहित याचिका की एक प्रति केंद्र सरकार के वकील वीसी भारती को सौंपने का अनुरोध किया ताकि वे अगली सुनवाई में न्यायालय की सहायता कर सकें। पीठ ने मामले को दो सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने को कहा है।
याचिका की मुख्य माँगें:
- प्रतिबंध: केंद्र सरकार को सोशल और ई-स्पोर्ट्स गेम्स की आड़ में कथित तौर पर चल रहे ऑनलाइन जुए और सट्टेबाजी प्लेटफॉर्मों पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए जाएं।
- वित्तीय लेन-देन पर रोक: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), एनपीसीआई (NPCI) और यूपीआई प्लेटफॉर्म्स को अवैध और गैर-पंजीकृत गेमिंग ऐप्स से जुड़े लेन-देन पर रोक लगाने का निर्देश दिया जाए।
- कर चोरी और जाँच: याचिका में आरोप लगाया गया है कि विदेशों से संचालित कई ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों ने लगभग ₹2 लाख करोड़ के बकाया करों का भुगतान नहीं किया है। इसके लिए इंटरपोल, सीबीआई (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जाँच कराने की मांग की गई है।
- कानूनों की व्याख्या: केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी, सूचना एवं प्रसारण, वित्त और युवा मामले एवं खेल मंत्रालयों को ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन एवं विनियमन अधिनियम, 2025 के प्रावधानों और राज्य विधानसभाओं द्वारा बनाए गए संबंधित कानूनों की सामंजस्यपूर्ण व्याख्या करने का निर्देश दिया जाए। (यह अधिनियम सुरक्षित डिजिटल मनोरंजन को बढ़ावा देने के लिए व्यापक ढांचा प्रदान करता है।)
याचिका में छह प्रतिवादियों को नामजद किया गया है, जिनमें चार केंद्रीय मंत्रालय और दो प्रमुख ऐप स्टोर संचालक, एप्पल इंक. और गूगल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।


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