निर्वाचन में बैठे भ्रष्ट सेटिंगबाजो की कलाकारी
587 बूथ बढ़े, 1500 से ज्यादा की सूची बनाई, फिर भी पूरे नहीं हुए बीएलओ ! क्योंकि सूची बनाने में की गड़बड़ी

इंदौर। निर्वाचन आयोग ने इंदौर में प्रत्येक बूथ पर मतदाता संख्या कम करते हुए नए मतदान केंद्र बनाए है और कुल 587 नए मतदान केंद्र बढ़ाए गए हैं। बड़े हुए मतदान केदो के लिए बीएलओ की नियुक्ति करने निर्वाचन शाखा से 1500 से अधिक शासकीय सेवकों की सूची बनाई गई और उन्हें बीएलओ नियुक्त किया, बावजूद इसके अब तक 587 बीएलओ नहीं मिले हैं। बतौर बीएलओ कार्यालय में उपस्थिति दर्ज नहीं कराने पर पिछले दिनों बड़ी संख्या में कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
निर्वाचन आयोग ने प्रत्येक मतदान केंद्र से मतदाताओं की संख्या कम करते हुए नए मतदान केदो का गठन किया है। इंदौर जिले में प्रत्येक बूथ पर पहले जहां 1400 से 1500 मतदाता थे वहीं अब उनकी संख्या करीब 1200 की गई है जिसके चलते जिले में 587 बूथ बढ़ गए हैं। इन्हीं नए बूथ पर नए बीएलओ नियुक्त करने के लिए कलेक्ट्रेट के निर्वाचन शाखा द्वारा 1500 से अधिक शासकीय कर्मचारियों की सूची बनाकर उन्हें नोटिस जारी किए गए। इसमें सबसे अधिक आश्चर्य की बात यह है कि 1500 से अधिक शासकीय सेवकों को सूचीबद्ध किया गया, बावजूद उसके निर्वाचन शाखा को 587 बीएलओ नहीं मिल पा रहे हैं। इसका मुख्य कारण है कोई बतौर बीएलओ काम नहीं करना चाहता तो किसी के पास अपने स्वयं के विद्यालय या कार्यालय में काम अधिक है। फिर भी 1500 में 587 उतनी बड़ी चुनौती नहीं है जितनी निर्वाचन शाखा में बैठे कलाकारों ने कर दी। दरअसल निर्वाचन शाखा के बाबुओं की कारस्तानी और लालच के कारण कार्य संपन्न नहीं हो पा रहा है।
जिनके पास जिम्मेदारी उन्हें बनाया बीएलओ
निर्वाचन शाखा के बाबूओ ने छांट-छांटकर ऐसे लोगों को बीएलओ बनाने के लिया नामांकित किया है जिनके पास उनके स्वयं के कार्यालय में अधिक काम है या काम की बड़ी जिम्मेदारी है या हाई स्कूल अथवा हायर सेकेंडरी स्कूल में पदस्थ ऐसे शिक्षक जिनके पास बड़ी कक्षाएं हैं। ऐसे लोग निर्वाचन का काम करते हैं तो उनके कार्यालय अथवा स्कूल में काम पीछे जाता है और अपने कार्यालय अथवा स्कूल का काम देखें तो निर्वाचन का कार्य समय पर नहीं कर पाएंगे। जबकि नगर निगम विकास प्राधिकरण शिक्षा विभाग अथवा अन्य सभी शासकीय कार्यालय में कई ऐसे कर्मचारी हैं या स्कूलों में छोटी कक्षाओं के कई ऐसे शिक्षक भी हैं जिनके पास बहुत अधिक काम नहीं है। उन्हें बीएलओ बनाने की जगह बड़ी कक्षाओं के शिक्षक या प्रमुख व्यक्तियों को बीएलओ बनाया और ज्वाइन नहीं करने पर अब नोटिस जारी किए हैं।
अध्यक्ष के रीडर बीएलओ बनाया
निर्वाचन शाखा में बैठे बाबूओ की कार्यशैली को इस एक उदाहरण से समझा जा सकता है। इंदौर विकास प्राधिकरण में अध्यक्ष के रूप में संभाग आयुक्त कार्य कर रहे हैं और उनके रीडर दुबे को बीएलओ बना दिया जबकि प्राधिकरण में इस काम के लिए 100 से अधिक कर्मचारी है।
दुबे के पास विकास प्राधिकरण की सभी शाखों के काम के साथ संभागायुक्त कार्यालय से भी बुलावा आता रहता है ऐसे में उन्होंने संभाग आयुक्त की अनुशंसा के साथ निर्वाचन कार्य से मुक्त करने के लिए आवेदन दिया था। उन्हें मुक्त नहीं किया गया और शोकाज नोटिस जारी कर है।


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Server Time : March 11, 2026 12:52 am