नई दिल्ली। डीपफेक से निपटने के लिए कई नई और उन्नत तकनीकें विकसित की जा रही हैं। इनका उद्देश्य डीपफेक का पता लगाना, उसकी प्रामाणिकता की जाँच करना और ऐसी सामग्री के प्रसार को रोकना है। डीपफेक का पता लगाने वाली तकनीकें ये तकनीकें मुख्य रूप से कैसे से काम करती हैं, इस पर भी 3काम किया जा रहा है।
तकनीक के युग में आई के आते ही फेक जानकारियां एक के बदले से सामने आने लगी। कहीं आई कपड़े पहन रहा है तो कहीं मिलती जुलती शक्ल सूरत बना रहा है। ऐसे में डीपीफेक से निपटने की नई तकनीक ईजाद की जा रही है। यह तकनीक फिलहाल 2 तारीख को से काम करती है। इसमें एक एआई मॉडल डीपफेक बनाने का प्रयास करता है, जबकि दूसरा उसे पहचानने के लिए प्रशिक्षित होता है। इस प्रक्रिया से डिटेक्शन मॉडल अधिक सटीक बन जाते हैं। दूसरा डीपफेक में अक्सर कुछ भौतिक असंगतियाँ रह जाती हैं। ये तकनीकें इन्हीं को पकड़ती हैं। इस तकनीक में भविष्य कई अपडेट आएंगे।
ये कुछ नई तकनीक है
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) आधारित पहचान के लिए कुछ नई तकनीक और उनके उपयोग इस प्रकार हैं।
बायोमेट्रिक विश्लेषण: यह तकनीक चेहरे की सूक्ष्म हरकतों, पलक झपकाने के पैटर्न और चेहरे पर रक्त प्रवाह के संकेतों का विश्लेषण करती है। इंटेल का “फेककैचर” इसी सिद्धांत पर काम करता है।
हाइब्रिड मॉडल: ये मॉडल अधिक सटीकता के लिए कई तरीकों को मिलाते हैं, जैसे कि वीडियो विश्लेषण, ऑडियो विश्लेषण और फोरेंसिक विश्लेषण।
रियल-टाइम डिटेक्शन: कुछ उन्नत एआई सिस्टम वास्तविक समय में ऑडियो और वीडियो स्ट्रीम का विश्लेषण करके डीपफेक का पता लगा सकते हैं। इससे वीडियो कॉल या लाइवस्ट्रीम में होने वाली धोखाधड़ी को रोका जा सकता है।
कुछ नई और उन्नत डिटेक्शन तकनीकें:
| तकनीक का नाम | कार्यप्रणाली | उपयोग और उदाहरण |
| बायोमेट्रिक विश्लेषण | यह तकनीक चेहरे की बहुत सूक्ष्म हरकतों, पलक झपकाने के पैटर्न और चेहरे पर रक्त प्रवाह के संकेतों का विश्लेषण करती है। | इंटेल का “फेककैचर” (FakeCatcher) इसी सिद्धांत पर काम करता है, जो वीडियो में मानव शरीर विज्ञान के संकेतों को पहचानता है। |
| हाइब्रिड मॉडल (Hybrid Models) | ये मॉडल अधिक सटीकता के लिए कई अलग-अलग पहचान तरीकों को एक साथ मिलाते हैं, जैसे कि वीडियो विश्लेषण, ऑडियो विश्लेषण, और फोरेंसिक (जांच संबंधी) विश्लेषण। | जटिल और उच्च-गुणवत्ता वाले डीपफेक की पहचान करने के लिए। |
| रियल-टाइम डिटेक्शन (Real-Time Detection) | कुछ उन्नत AI सिस्टम वास्तविक समय में ऑडियो और वीडियो स्ट्रीम का विश्लेषण करके डीपफेक का पता लगा सकते हैं। | वीडियो कॉल या लाइवस्ट्रीम के दौरान होने वाली धोखाधड़ी या जालसाजी को तुरंत रोकने के लिए। |


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