पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के लिए राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेतृत्व वाले महागठबंधन में सीटों का बहुप्रतीक्षित बंटवारा बुधवार को लगभग तय हो गया, जिसकी आधिकारिक घोषणा आज शाम तक होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, लंबी बातचीत और गतिरोध के बाद, गठबंधन के प्रमुख घटक दल कांग्रेस को 60 सीटें और भाकपा-माले (CPI-ML-Liberation) को 19 सीटें दिए जाने पर सहमति बन गई है, जिससे राज्य में चुनावी सरगर्मियाँ तेज हो गई हैं। इस समझौते के तहत, आरजेडी अपने सबसे बड़े हिस्से के साथ चुनाव लड़ेगी, जबकि अन्य वामपंथी दलों (CPI और CPM) और मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी (VIP) को भी सीटें आवंटित की गई हैं।

महागठबंधन, जिसमें राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस, वामपंथी दल और वीआईपी शामिल हैं, पिछले कई दिनों से सीट आवंटन को लेकर गहन विचार-विमर्श कर रहा था। कांग्रेस नेतृत्व ने शुरुआत में 70 से अधिक सीटों की मांग की थी, लेकिन सूत्रों के हवाले से यह खबर है कि पार्टी नेतृत्व 60 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए सहमत हो गया है। इसी तरह, भाकपा-माले, जिसने अपनी मजबूत उपस्थिति का हवाला देते हुए 30 सीटों की मांग की थी, अब 19 सीटों पर राजी हो गई है। एनडीए द्वारा पहले ही अपने सीट बंटवारे की घोषणा कर देने के बाद, महागठबंधन पर औपचारिक घोषणा करने का भारी दबाव था, खासकर पहले चरण के नामांकन की समय सीमा करीब होने के कारण।
गतिरोध का अंत और प्रमुख खिलाड़ियों का हिस्सा
महागठबंधन में सीटों की संख्या को लेकर मुख्य विवाद आरजेडी, कांग्रेस और वाम दलों के बीच था। 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 122 है। महागठबंधन के सबसे बड़े दल, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के पास सबसे अधिक सीटें होंगी, जिसकी संख्या 140 के आसपास होने का अनुमान है, ताकि वह छोटे सहयोगियों को भी समायोजित कर सके।
महागठबंधन के एक वरिष्ठ रणनीतिकार ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “सीटों की संख्या तय करना एक जटिल प्रक्रिया थी, लेकिन हमने जीत की क्षमता और 2020 के विधानसभा चुनाव में प्रदर्शन को आधार बनाया है। कांग्रेस 60 सीटों पर सहमत हो गई है क्योंकि हमारा लक्ष्य चुनाव जीतना है, न कि सिर्फ अधिक सीटों पर लड़ना।” आरजेडी ने, वीआईपी (विकासशील इंसान पार्टी) के नेता मुकेश सहनी को भी 18 सीटें दिए जाने की खबर है, जिससे गठबंधन का समीकरण और भी मजबूत हो गया है। वीआईपी की एंट्री ने समीकरणों को बदला है और कांग्रेस को अपनी सीटों की मांग कम करने के लिए प्रेरित किया है।
वाम दलों का बढ़ता प्रभाव
भाकपा-माले (CPI-ML) के हिस्से में 19 सीटें आना वाम दलों के बढ़ते महत्व को दर्शाता है। 2020 के पिछले चुनाव में भी माले को 19 सीटें मिली थीं और उसने उनमें से 12 पर जीत हासिल की थी, जो गठबंधन के भीतर उसका एक मजबूत प्रदर्शन था। भाकपा-माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, जो पहले 18 से अधिक सीटों की मांग कर रहे थे, अब 19 सीटों के आवंटन पर संतुष्टि जाहिर कर सकते हैं। वहीं, अन्य वाम दलों – भाकपा (CPI) और माकपा (CPM) को भी कुछ सीटें दी गई हैं, हालाँकि उनकी संख्या कम है। कुछ सीटों पर दावेदारी को लेकर विवाद अभी भी पूरी तरह से सुलझा नहीं है। उदाहरण के लिए, बछवाड़ा सीट को लेकर अभी भी चर्चा जारी है, जहां कांग्रेस अपने पूर्व विधायक के बेटे को उतारना चाहती है, जबकि आरजेडी इस सीट को भाकपा को देना चाहती है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
2020 के पिछले विधानसभा चुनाव में, महागठबंधन (तब आरजेडी, कांग्रेस, और वाम दलों के साथ) ने कुल 110 सीटें जीती थीं, जबकि एनडीए को 125 सीटें मिली थीं। उस चुनाव में, कांग्रेस ने 70 सीटों पर चुनाव लड़ा था लेकिन सिर्फ 19 सीटें ही जीती थी, जिसका स्ट्राइक रेट कमजोर था। यही कारण है कि आरजेडी इस बार कांग्रेस को कम सीटें देने के पक्ष में थी, जबकि कांग्रेस अपनी साख का हवाला देते हुए अधिक सीटों पर अड़ी थी। इस बार, गठबंधन के लिए समय की कमी सबसे बड़ी चुनौती है, क्योंकि पहले चरण के नामांकन की अंतिम तिथि 17 अक्टूबर है। एनडीए (भाजपा, जदयू, लोजपा-आर, रालोमो, हम) पहले ही अपने सीट बंटवारे की घोषणा कर चुका है, जिसमें भाजपा और जदयू को 101-101 सीटें आवंटित की गई हैं, और छोटे सहयोगियों को शेष सीटें दी गई हैं।
संभावित निहितार्थ और आगे की राह
सीट बंटवारे की औपचारिक घोषणा से महागठबंधन के कार्यकर्ताओं और उम्मीदवारों में उत्साह की लहर दौड़ने की उम्मीद है और वे अब प्रचार को तेज कर सकेंगे। इस समझौते से स्पष्ट है कि आरजेडी, अपने नेता तेजस्वी यादव के तहत, एक बड़े भाई की भूमिका निभा रहा है, जबकि सहयोगियों को भी उनके प्रदर्शन और क्षेत्रीय प्रभाव के आधार पर महत्वपूर्ण सीटें मिली हैं।
हालांकि, कांग्रेस के कुछ नेताओं में 60 सीटों के आवंटन को लेकर असंतोष हो सकता है, लेकिन चुनाव से पहले एकता बनाए रखना महागठबंधन के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। अंतिम घोषणा के बाद, अब सभी की निगाहें इस बात पर होंगी कि महागठबंधन के उम्मीदवार चुनावी मैदान में किस तरह से ताल ठोकते हैं और क्या वे एकजुट होकर एनडीए को कड़ी टक्कर दे पाते हैं।


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