इंदौर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सवारी ढोने (राइड-शेयरिंग) और माल पहुंचाने (डिलीवरी) के लिए उपयोग होने वाले दुपहिया वाहनों (टू-व्हीलर) को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने आदेश दिया है कि ऐसे सभी वाहनों को अब व्यावसायिक वाहनों (Commercial Vehicles) की तरह रजिस्टर्ड करना होगा और उन पर पीली नंबर प्लेट लगाना अनिवार्य होगा। मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने शुक्रवार को राज्य सरकार को कड़ाई से निर्देश दिए कि इन नियमों के पालन में किसी भी प्रकार की ढील-पोल नहीं होनी चाहिए।
क्यों दिया गया यह आदेश?
हाई कोर्ट ने यह निर्देश छात्र आयुष जाट द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिकाकर्ता के अभिभाषक विकास यादव ने कोर्ट को बताया कि शहर में यात्रियों को लाने-ले जाने के लिए जो बाइकें इस्तेमाल हो रही हैं, वे वास्तव में निजी उपयोग के लिए रजिस्टर्ड हैं। उन्होंने तर्क दिया कि निजी तौर पर रजिस्टर्ड इन बाइकों से दुर्घटना होने की स्थिति में सवारियों की सुरक्षा और क्षतिपूर्ति को लेकर कोई ठोस व्यवस्था नहीं है, जिससे यात्रियों की जान जोखिम में रहती है।
मोटर व्हीकल एक्ट का हवाला
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि वाहन उपलब्ध कराने वाली कंपनियाँ तो रजिस्टर्ड हैं, लेकिन उनमें चलने वाले वाहन कमर्शियल श्रेणी में शामिल नहीं हैं। युगलपीठ ने मोटर व्हीकल एक्ट का हवाला देते हुए कहा कि एक्ट में यह साफ है कि जो वाहन सवारियों या माल को ढोते हैं, उन्हें कमर्शियल वाहन के तौर पर रजिस्टर्ड होना जरूरी है। यात्रियों की सुरक्षा और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कोर्ट ने यह आदेश जारी किया।
जीपीएस लगाना भी हुआ अनिवार्य
हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब सवारी और माल ढोने वाले टू-व्हीलर को व्यावसायिक वाहन के सभी नियमों का पालन करना होगा। इसका मतलब है कि पीली नंबर प्लेट के साथ-साथ इन बाइकों में जीपीएस (GPS) सिस्टम लगाना भी अनिवार्य होगा।
इस फैसले से मध्य प्रदेश में राइड-शेयरिंग और डिलीवरी प्लेटफॉर्म पर चलने वाले लाखों दुपहिया वाहन सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। राज्य सरकार को अब इस आदेश को सख्ती से लागू करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।


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