रायपुर : माओवादी संगठन के केंद्रीय कमेटी प्रवक्ता अभय द्वारा 17 सितम्बर को एक पत्र जारी किया गया था. जिसमें नक्सलियों के आत्मसमर्पण करने के लिए नीति बनाने और नक्सल कमांडरों से बातचीत करने के लिए एक महीने के लिए सुरक्षा बलों से सीजफायर की मांग की थी. हालांकि वह पत्र एक महीने पहले 15 अगस्त को लिखा गया था. पत्र के जारी होने के बाद हर स्तर पर इस बात की समीक्षा होने लगी थी. पत्र की प्रासंगिकता को लेकर भी सवाल उठे थे.
ईटीवी भारत ने पत्र के जारी होने के बाद नक्सली आत्मसमर्पण और मुख्यधारा में लौटने के पहलुओं पर चर्चा की थी. इसमें सबसे बड़ी बात पहले ही निकलकर यह सामने आई थी पत्र की प्रासंगिकता कितनी सही है. देश के पहले नक्सल डीजी और छत्तीसगढ़ के डीजीपी रहे डीएम अवस्थी ने इसे लेकर कहा था कि इससे पहले भी कई बार अनेक पत्र आए हैं.
क्या थी चिट्टी- केंद्रीय कमेटी प्रवक्ता अभय द्वारा 17 सितम्बर को जो पत्र जारी किया था उसमें लिखा गया था कि ” मार्च 2025 के आखिरी सप्ताह से हमारी पार्टी सरकार के साथ शांति की वार्ता के लिए प्रयास कर रही है. पार्टी ने हथियार छोड़ने के लिए सीनियर नक्सली कामरेड से सलाह मशविरा के लिए एक माह का समय मांगते हुए सीजफायर की मांग की थी. लेकिन केंद्र की तरफ से इसका कोई जवाब नहीं आया. बल्कि इस दौरान हमले और तेज कर दिए गए.”
इस पत्र के आने के बाद इस बात की चर्चा तेज हो गई कि नक्सली अब मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं. हालांकि इस पत्र को केंद्रीय कमेटी प्रवक्ता अभय द्वारा ही भेजा गया है यह साफ नहीं हुआ. छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री सह गृहमंत्री विजय शर्मा ने भी पत्र की प्रासंगिकता पर सवाल उठाया था. साथ ही यह भी कहा था कि यदि हथियार छोड़कर नक्सली वार्ता के लिए आते हैं तो निश्चित तौर पर बात की जाएगी.
चिट्ठी को लेकर नक्सलियों का हुआ दो गुट- अभय द्वारा जारी किए गए पत्र के बाद नक्सलियों के बीच खींचतान की स्थिति शुरू हो गई थी. पत्र की प्रासंगिकता को लेकर अभी चीजें साफ नहीं हुई है. हालांकि अब तेलंगाना स्टेट कमेटी के प्रतिनिधि जगन ने इस बात को रखा है की जो बातें पत्र में लिखी गई है वह अभय की निजी राय है. जगन से साफ किया है कि इससे अनावश्यक भ्रम की स्थित पैदा हो रही है यह पार्टी का आधिकारिक निर्णय नहीं है.
नक्सली शांति वार्ता पर दो पत्रों पर विजय शर्मा का बयान: नक्सलियों के दो पत्रों पर डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि जो पहला पत्र आया था वो छत्तीसगढ़ में सक्रिय पोलित ब्यूरो मेंबर का है, दूसरा पत्र तेलंगाना के जूनियर कैडर का है. वो अलग मामला है. हमसे संबंधित नहीं है. विजय शर्मा ने एक बार फिर कहा कि नक्सली पहले आम लोगों की हत्या बंद करें. आईईडी हटाए. उसके बाद ही कोई बात होगी.
पहले ही शंका थी Ex DGP – नक्सली प्रवक्ता अभय द्वारा जारी की गई चिट्ठी और उसके बाद अब उस चिट्ठी को लेकर आए खंडन को लेकर ईटीवी भारत से बात करते हुए पूर्व डीजीपी राजीव माथुर ने कहा कि इस बात को लेकर पहले ही शंका थी कि नक्सली एक फ्रंट पर आकर किसी एक समझौते को अंतिम रूप दे दिए हैं. हथियार छोड़कर समर्पण करना यह बहुत बड़ी बात है. अगर ऐसा नक्सली करने के लिए तैयार हुए थे तो निश्चित तौर पर भारत के विकास का एक नया अध्याय होता.
राजीव माथुर ने आगे कहा कि जो अब तक नक्सलियों को लेकर काम करने दौरान अनुभव रहे हैं, हमें पहले से इस बात का शक था कि सभी नक्सली संगठन के जो भी बड़े कैडर हैं वह इस बात पर सहमत होंगे. राजीव माथुर ने कहा कि जिस तरह के हाल के दिनों मे मुठभेड़ में नक्सलियों के कमांडर और शीर्ष नेतृत्व के लोग मारे गए हैं उससे नक्सलियों में एक डर का माहौल है लेकिन अभी भी नक्सली हथियार के साथ पूर्ण समर्पण करेंगे यह होगा पहले से ही संदिग्ध था. पूर्व डीजीपी ने कहा कि हमेशा नक्सलियों की धुरी ऐसी रही है जो हथियार छोड़ने को तैयार नहीं थी.


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