पश्चिम बंगाल के कोलकाता में किए गए एक अध्ययन में चौंकाने वाला खुला हुआ है. दरअसल, यहां दो तिहाई से अधिक महिलाओं को सार्वजनिक शौचालयों का उपयोग करने के लिए अपनी दैनिक आय का लगभग 10% खर्च करना पड़ता है. अध्ययन में पाया गया कि फिर भी, वे जो भुगतान करती हैं उसके अनुसार सुविधाएं नहीं होती हैं. क्योंकि 61 फीसदी महिलाओं ने बताया कि उनके पास साबुन या हाथ धोने की सुविधा नहीं है, 56 प्रतिशत ने बताया कि आसपास गंदगी रहती है. इसके अलावा, आधे से ज्यादा ट्रांसजेंडर ने कहा कि उन्हें शौचालयों में उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है. वहीं इस पर लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. आईए जानते हैं क्या कुछ कहा…
सबर इंस्टीट्यूट और आजाद फाउंडेशन द्वारा किए गए अध्ययन ने शहर के सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में सुरक्षित, स्वच्छ और समावेशी सार्वजनिक शौचालयों की कमी को उजागर किया है. शहर में परिवहन और कनेक्टिविटी का विस्तार तो हुआ है, लेकिन स्वच्छता की बुनियादी जरूरत अब भी उपेक्षित है, जिसका महिलाओं पर असमान रूप से बुरा असर पड़ रहा है.


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