बेटा, बेटी, साले सहित कई रिश्तेदारों के नाम संपत्ति,
25 हजार के वेतन में 50 करोड़ का अवैध साम्राज्य
भूखंड ठिकाने लगाने की उच्च स्तरीय तैयारी, दस्तावेज तैयार कर रहा है लोकायुक्त में पकड़ाया जैन
इंदौर (जनहित मीडिया)। गांधीनगर गृह निर्माण संस्था में कर्मचारी रहते हुए कुछ सौ रुपए से नौकरी शुरू करने वाले कर्मचारी फूलचंद पांडे ने 2 महीने पहले निष्कासन तक 20 से 25 हजार रुपए के वेतन में करोड़ो की एम्पायर खड़ी कर ली। मकान, प्लॉट, गोदाम, स्कूल सहित अन्य संपत्ति पांडे परिवार के पास कैसे आई यह जांच का विषय है। इसकी लोकायुक्त जांच हो तो करोड़ों का भ्रष्टाचार उजागर होगा।

गांधीनगर गृह निर्माण संस्था के प्रबंधक फूलचंद पांडे ने कुछ भ्रष्ट अधिकारियों से सांठ-गांठ कर न केवल संस्था को बल्कि प्रशासन से लेकर सरकार तक सबको खूब “फूल” बनाया है। संस्था के सदस्यों के हित की आड़ में पांडे ने सरकारी जमीन पर खूब चांदी काटी और अपने पूरे कुनबे के साथ रिश्तेदारों और मित्र मंडली के भी बारे न्यारे कर दिये। पांडे ने संस्था में हेरफेर कर अपने परिवार के लिए करोड़ों के संपदा जोड़ ली है। शासन द्वारा पद से हटाने तक पांडे का वेतन लगभग 25000 था लेकिन गांधीनगर में स्वयं के आवास वाले मकान के अलावा पास का एक अन्य मकान और बेटे दीपक का करीब 4000 वर्गफीट का गोदाम, बेटी आरती पति सतीश निवासी देवास के नाम पर 2800 वर्ग फीट (40×70 ) प्लॉट और साला श्रीकांत (मप्र शासन में जेलर है) को दिया जा चुका है। इतना ही नहीं पांडे परिवार के पास गांधीनगर में इतनी ही अन्य संपत्ति है। इसके अलावा 2 एकड़ से अधिक भूमि पर एक स्कूल भी है। अकेले स्कूल ही 15 से 20 करोड़ की संपत्ति है जबकि कुल संपत्ति 40 करोड़ से अधिक होगी।
सवाल यह है कि 25000 के वेतन वाला व्यक्ति अपने पूरे जीवन में अपने लिए घर नहीं बना सकता है वहीं पांडे ने आपको संपदा कैसे जमा की ?
कठपुतली है संचालक मंडल
पांडे के पास परिजनों, रिश्तेदारों के रूप में संस्था में सदस्य बनाए हुए कई ऐसे लोग भी हैं जोअन्य शहरों यहां तक की प्रदेश के बाहर से भी मतदान के लिए सदस्य आते हैं और इन्हीं मतदाताओं के भरोसे संस्था में अपनी पसंद से संचालक मंडल का चुनाव करवाया जाता है जो बाद में कठपुतली की तरह इशारे पर काम करता है।


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