इंदौर-इच्छापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सिमरोल के समीप भेरूघाट स्थित बाबा ढाबा क्षेत्र में रविवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। यहाँ नर्मदा-क्षिप्रा लिंक परियोजना की एक विशाल मुख्य पाइपलाइन अचानक तेज धमाके के साथ फूट गई। पाइपलाइन के भीतर पानी का दबाव इतना अधिक था कि फटने के बाद सैकड़ों फीट की ऊँचाई तक पानी का तेज फव्वारा उठने लगा। इस घटना से पूरे इलाके में अफरातफरी मच गई। सबसे बड़ी चिंता की बात यह थी कि जिस स्थान पर पाइपलाइन फटी, उसके ठीक पास से हाईटेंशन विद्युत लाइन का टावर गुजर रहा है, जिससे क्षेत्र में करंट फैलने का भारी डर पैदा हो गया था।
खतरे को भांपते हुए स्थानीय नागरिकों ने तत्परता दिखाई और एहतियात के तौर पर सड़क के दोनों ओर से वाहनों की आवाजाही को रोक दिया। इसके चलते इंदौर-इच्छापुर नेशनल हाईवे पर कई घंटों तक वाहनों का चक्काजाम रहा और दोनों तरफ लंबी कतारें लग गईं। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि गर्मी के मौसम में मालवा अंचल और उज्जैन में जलापूर्ति बनाए रखने के लिए लाइन में हाई प्रेशर से पानी छोड़ा जा रहा था। पाइपलाइन फटने से निकला पानी तेज बहाव के साथ हाईवे के पास बने कुछ मकानों में भी घुस गया, जिससे लोगों के टीवी, फ्रिज और अन्य घरेलू सामानों को काफी नुकसान पहुँचा है। हालांकि, कोई जनहानि नहीं हुई।
तकनीकी कारण: बंदर के कूदने से हुआ फॉल्ट
घटना के कारणों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर स्थिति स्पष्ट की गई है:
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एनवीडीए (NVDA) के एसडीओ के.एल. निशोद के अनुसार, यह हादसा एक अप्रत्याशित तकनीकी फॉल्ट के कारण हुआ। दरअसल, एक बंदर के बिजली के तार पर कूदने से सिस्टम में ‘इलेक्ट्रॉनिक ट्रिप’ हो गया।
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ट्रिपिंग की वजह से पानी लिफ्ट कर रही सभी भारी विद्युत मोटरें अचानक एक साथ बंद हो गईं और पंपिंग रुक गई।
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पंपिंग बंद होते ही भेरूघाट की चढ़ाई पर चढ़ रहा भारी मात्रा में पानी तेजी से वापस (बैक प्रेशर) लौटने लगा।
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इस अप्रत्याशित रिवर्स प्रेशर के कारण पाइपलाइन के ‘मैनहोल’ (मरम्मत के लिए अंदर जाने वाले ढक्कन) पर भारी दबाव पड़ा और उसकी वेल्डिंग उखड़ गई, जिससे पानी फव्वारे के रूप में बाहर आ गया।
इंदौर शहर की जलापूर्ति सुरक्षित:
जल संसाधन समिति के प्रभारी अभिषेक शर्मा ‘बबलू’ ने इंदौर वासियों को राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि यह पाइपलाइन मुख्य रूप से सिंचाई और उज्जैन संभाग की परियोजना से जुड़ी है। इसके फूटने से इंदौर शहर की घरेलू पेयजल आपूर्ति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
सूचना मिलते ही नर्मदा घाटी विकास विभाग की तकनीकी टीम और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुँचे। चूंकि पाइपलाइन में पहले से भारी मात्रा में पानी मौजूद था, इसलिए मुख्य वाल्व बंद करने के बाद भी काफी देर तक पानी बहता रहा। विभाग ने हाईवे पर यातायात बहाल कराने के साथ ही वेल्डिंग और पाइपलाइन की मरम्मत का कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस पहाड़ी घाट क्षेत्र में ऐसी घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं, अतः विभाग को इसका कोई स्थायी तकनीकी समाधान निकालना चाहिए।


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