प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तारी के बाद एक महीने तक जमानत न मिलने की स्थिति में पद से हटाने से जुड़े संविधान (130वां संशोधन) विधेयक को लेकर बुधवार को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की बैठक में गहन चर्चा हुई। भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी की अध्यक्षता वाली इस समिति में कानून के दायरे और इसके प्रभावों को लेकर कई तीखे सवाल उठे।
क्या ‘नेता प्रतिपक्ष’ भी आएंगे इस कानून के दायरे में?
बैठक के दौरान समिति के सदस्यों ने एक महत्वपूर्ण संवैधानिक और वैधानिक सवाल उठाया। सदस्यों ने विशेषज्ञों से जानना चाहा कि:
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यदि कोई नेता प्रतिपक्ष (LoP) गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार होता है और एक महीने तक उसे जमानत नहीं मिलती, तो क्या उसे भी इस प्रस्तावित कानून के तहत पद से हटाया जाएगा?
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चूंकि नेता प्रतिपक्ष का पद एक वैधानिक पद है, इसलिए क्या इसे प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के समान श्रेणी में रखा जाना चाहिए?
विशेषज्ञों की राय और लिखित सुझाव
बैठक में विधि आयोग के अध्यक्ष दिनेश महेश्वरी, एनएलयू के कुलपति जी.एस. बाजपेयी और नालसार विश्वविद्यालय के कुलपति श्रीकृष्ण देव राव ने अपने विचार साझा किए। समिति अध्यक्ष अपराजिता सारंगी ने बताया कि:
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सभी विशेषज्ञों से इन विधेयकों पर लिखित सुझाव और विस्तृत टिप्पणियां मांगी गई हैं।
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समिति ने पहले भी सरकार से पूछा था कि क्या दुनिया के किसी भी देश में इस तरह के कानून का कोई उदाहरण मौजूद है?
प्रमुख विपक्षी दलों ने बनाई दूरी
31 सदस्यीय इस संयुक्त समिति से देश के कई बड़े विपक्षी दलों ने किनारा कर लिया है।
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शामिल दल: एनसीपी (सुप्रिया सुले), एआईएमआईएम (असदुद्दीन ओवैसी), अकाली दल और वाईएसआरसीपी।
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दूरी बनाने वाले दल: कांग्रेस, टीएमसी, सपा, डीएमके, शिवसेना-यूबीटी और आम आदमी पार्टी।
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विरोध का तर्क: इन दलों का मानना है कि यह विधेयक उस मूल कानूनी सिद्धांत का उल्लंघन करता है जिसमें “दोषी साबित होने तक व्यक्ति को निर्दोष माना जाता है”। उनका आरोप है कि यह राजनीतिक प्रतिशोध का हथियार बन सकता है।
चर्चा के केंद्र में तीन विधेयक
समिति वर्तमान में तीन प्रमुख विधेयकों की समीक्षा कर रही है:
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संविधान (130वां संशोधन) विधेयक
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जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक
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केंद्र शासित प्रदेश शासन (संशोधन) विधेयक
बैठक में विपक्ष के एक सदस्य ने यह सुझाव भी दिया कि समिति से बाहर के राजनीतिक दलों को भी राय देने के लिए बुलाया जाए, जिस पर अन्य सदस्यों के बीच असहमति देखी गई।


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