गुरदासपुर: इस साल गुरदासपुर और पठानकोट समेत कई जिलों में बड़ा नुकसान करने के बाद अब मानसून ने वापसी शुरू कर दी है। इसके चलते सितंबर महीने के तीसरे हफ्ते में भी लोगों को एक बार फिर से गर्मी और उमस का सामना करना पड़ रहा है। इस साल राज्य में 621.7 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जो सामान्य बारिश 418.1 मिमी के मुकाबले करीब 33% अधिक है। इस साल अगस्त महीने में हुई बारिश ने पिछले 26 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।
अगर मानसून की मात्रा के आंकड़ों की जांच की जाए तो कई दिलचस्प तथ्य सामने आते हैं, जिनमें सबसे अहम बात यह है कि पंजाब में पिछले 7 सालों में 4 बार बड़ी बाढ़ आई है, जबकि 18 सालों में 2008, 2019, 2023 और 2025 के दौरान 4 बाढ़ें आ चुकी हैं। लेकिन इन सभी 4 सालों में से 2 ऐसे सालों में बाढ़ आई जब राज्य में बारिश सामान्य से ज्यादा नहीं हुई थी। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 18 सालों में राज्य में 2009, 2011, 2012, 2014, 2015, 2016, 2017 और 2024 वाले 8 सालों में कम वर्षा हुई है, जबकि 2010, 2013, 2019, 2020, 2021, 2022 और 2023 वाले 7 सालों में बारिश की स्थिति सामान्य रही और 2008, 2018 और 2025 के दौरान 3 साल सामान्य से ज्यादा बारिश हुई। इनमें से 2008 और 2025 में अतिरिक्त वर्षा हुई और 2019 व 2023 में सामान्य वर्षा होने के बावजूद राज्य के लोगों को बाढ़ की मार झेलनी पड़ी। ऐसी स्थिति में लोगों में यह चर्चा जोरों पर है कि आखिर वे कौन से कारण हैं, जिनकी वजह से लोगों को बार-बार बाढ़ की मार झेलनी पड़ती है।
कब-कब आई थीं बाढ़ें?
इकट्ठी जानकारी के अनुसार, साल 2008 में हिमाचल प्रदेश में हुई बारिश ने सतलुज को नक्को-नक भर दिया था और राज्य में हुई सामान्य से ज्यादा बारिश ने ऐसे खतरनाक हालात पैदा कर दिए थे कि जालंधर और कपूरथला में धुस्सी बांध टूटने से कई गांव पानी की चपेट में आ गए थे। इसी तरह 2019 में 15–17 जुलाई के दौरान भारी वर्षा के बाद घग्गर नदी के साथ-साथ टांगरी और मर्कंडा नदियां भी पानी से भर गईं, जिसके परिणामस्वरूप इनके प्रकोप में मालवा के कई गांव डूब गए। उसी साल सतलुज में भी रिकॉर्ड 2.75 लाख क्यूसेक पानी बहा, जिससे कमजोर बांध टूट गए और सैंकड़ों गांवों को भारी नुकसान हुआ। साल 2023 में भी जुलाई का पहला हफ्ता खत्म होते ही बारिश के कहर के कारण ब्यास, सतलुज और घग्गर में करीब 100 जगहों पर बांध टूट गए और लगभग 1400 गांवों में नुकसान हुआ। इसी तरह 15 अगस्त के आसपास हिमाचल में भारी वर्षा के बाद ब्यास नदी में आए पानी ने गुरदासपुर और होशियारपुर जिलों के गांवों में तबाही मचाई। अब इस साल रावी नदी में आए बेहिसाब पानी ने माझे के जिलों को डुबो दिया।
अगस्त और सितम्बर में घातक साबित होती है ज्यादा बारिश
साल 2008 में अगस्त महीने के दौरान 46.4% अतिरिक्त बारिश हुई थी, जबकि 2023 में 54.9% और 2025 अगस्त के दौरान 74% अधिक बारिश हुई है। इस वजह से पिछले 26 सालों में इस साल अगस्त महीना सबसे ज्यादा बारिश वाला साबित हुआ है। दूसरी ओर, जब भी सितंबर महीने में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है तो भारी नुकसान हुआ है। उदाहरण के तौर पर, 2008 में 104.7% अतिरिक्त बारिश हुई थी और उस समय भारी तबाही हुई थी। 2019 में 15% कम वर्षा हुई थी, जबकि 2023 में सितंबर महीने में 64.6% और सितंबर 2025 में अब तक 112% अतिरिक्त बारिश हो चुकी है।


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