हिंदू धर्म में हर पर्व, हर व्रत और त्योहार का अपना अलग और विशेष महत्व है. पंचांग के अनुसार हर साल महालक्ष्मी व्रत भाद्रपद माह के शुक्ल अष्टमी से शुरू होता है और आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को इस व्रत का समापन होता है.
महालक्ष्मी व्रत, गणेश चतुर्थी के चार दिन बाद आता है. यह व्रत सोलह दिनों तक मनाया जाता है. इस व्रत का समापन आश्विन माह की कृष्ण अष्टमी को होता है. साल 2025 में यह व्रत 14 सितंबर 2025, रविवार के दिन समाप्त होगा. इस व्रत का पालन करने से धन और समृद्धि की देवी महालक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को आशीर्वाद देती हैं. इस व्रत को गजलक्ष्मी व्रत के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इस व्रत में गज पर बैठी मां लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है.


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